Papa
Aarav, 22, at the door of his father's room. A packed bag behind him.
पापा… आपको पता है मुझे सबसे ज़्यादा डर किस बात का लगता है?
आपके गुस्से से नहीं। आपकी चुप्पी से।
बचपन में जब मैं गिरता था, आप दौड़कर नहीं आते थे। दूर खड़े रहते थे। कहते थे — "खुद उठ। मर्द बन।"
मैं उठ गया, पापा। हर बार उठा। बिना रोए उठा।
(pause)
पर आज… आज जब मैं कह रहा हूँ कि मुझे वो नौकरी नहीं चाहिए — तो आप फिर वहीं खड़े हैं। दूर। चुप।
आपको लगता है मैं भाग रहा हूँ।
मैं भाग नहीं रहा, पापा। मैं पहली बार अपनी तरफ़ चल रहा हूँ।
(steps closer)
आपने पूरी ज़िंदगी वो काम किया जो आपको पसंद नहीं था — सिर्फ़ इसलिए कि मैं वो कर सकूँ जो मुझे पसंद है।
तो आज जब मैं वही कर रहा हूँ, तो ग़लत कैसे हो गया?
मुझे आपसे पैसे नहीं चाहिए। एक रुपया नहीं चाहिए।
बस एक बार… सिर्फ़ एक बार सुनना है — "जा बेटा। कर ले।"
(voice breaks)
और अगर मैं गिरा…
तो इस बार दूर मत खड़े रहना, पापा।
इस बार हाथ पकड़ लेना।
How to play it
Start low and controlled. The temptation is to open loud, but the piece only works if you have
somewhere to go.
"मैं उठ गया, पापा" should be almost matter-of-fact — no self-pity. Save the break for the final
four lines.
The pause after "चुप" is the most important beat in the script. Hold it longer than feels
comfortable.
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